Thursday, January 8, 2026

Gulal-e-ishq

 ये सुबह तुम्हारी चमक से खिल के आई है ।

गुलाबी गालों से तुम्हारी गुलाल खुद को रंगाई है ।

जुल्फें जो बिखरे तुम्हारी हवाओं में फिजाएं भी भीनी भीनी खुशबू लाई है।

तुम्हारी मुस्कुराहट जो खिल उठी चेहरे पे उस रंगत से होली अपनी रंग सजाई हे।


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