जब दो हस्ति एक जैसे सोचते हैं
लढते हैं फिर भी एक दूसरे की दिल में बसते हैं
साथ हँसते हैं साथ रोते हैं
मुसीबत में हाथ से हाथ मिलाके चलते हैं
बात बात पे रूठते मनाते हैं
हरपाल नई नॉटंकी करते हैं
दोस्त हितो हैं जो हरपल अपनी हक़ जताते हैं
गणेश पृष्टि(जेम्स)
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